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नटखट सा चाँद

यादों के झरोखे से झांकता हुआ मन के किसी कोने को सजाता हुआ आता है जब भी नटखट सा ये चाँद असंख्य सजीले चमकीले  छोटी छोटी किरणों के गुच्छे जगमगा उठते अनायास भर देते  है मन को  आकांक्षाओं के सागर से मचलने लगती है बाहें आगोश में  भर लेने को  आता है पर हाथ कहाँ  नटखट सा ये चाँद.. © चंद्रलेखा