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कविता -- प्यारी मुस्कान

  चढ़ती धूप सी गुनगुनाती ख़ामोश लजाती  आँखों की  कोरों से झर जाती धीरे -धीरे साँझ की  सुरमई बन सिमट जाती रात की  आहट-सी  फिर सहमकर रख तुम्हारे काँधे  पर सर सो जाती चुपचाप  प्यारी मुस्कान …  ------------    ©चंद्रलेखा

कविता : अनसुलझे सवाल

अनसुलझे  सवाल              आसमान का चूल्हा ये, जलता नहीं है आज क्यों,

कविता :-'ज़रूरी तो नहीं '

'ज़रूरी तो नहीं .....' जिंदगी में जीने के लिए ज़रूरी है साँसे किन्तु; साँसे ही जिंदगी हों , ज़रूरी तो नहीं .