कविता -- प्यारी मुस्कान

 





चढ़ती धूप सी
गुनगुनाती
ख़ामोश लजाती 
आँखों की  कोरों से
झर जाती धीरे -धीरे
साँझ की  सुरमई बन
सिमट जाती
रात की  आहट-सी  फिर
सहमकर रख
तुम्हारे काँधे  पर सर
सो जाती चुपचाप 
प्यारी मुस्कान …

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   ©चंद्रलेखा

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