कविता :-'ज़रूरी तो नहीं '

'ज़रूरी तो नहीं .....'

जिंदगी में जीने के लिए ज़रूरी है साँसे
किन्तु;
साँसे ही जिंदगी हों , ज़रूरी तो नहीं .


जिंदगी में सच्चाई का होना ज़रूरी है , लेकिन ,
सच्चाई ही जिंदगी हो
ये ज़रूरी तो नहीं .......
प्रेम के बिना जिंदगी कुछ भी नहीं
सच है मगर ,
सभी की जिंदगी में प्रेम हो ,
ये ज़रूरी नहीं .
हरेक चेहरा एक खुली किताब तो होता है ज़रूर
मगर;
हर कोई इसे पढ़ सके ,
ये ज़रूरी तो नहीं .......
धीरे धीरे आ ही जाता है जीने का सलीका
मगर ;
जीने का सलीका सबको सिखा सके जीना
ये ज़रूरी तो नहीं .......
सच बोलना तो बहुतों को आता है मगर
सच सुनना भी सभी को आता हो
ये ज़रूरी तो नहीं .......
    ---------------


©चंद्रलेखा

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मौसम आते है ....

कविता -- प्यारी मुस्कान